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Kisan: मार्च में राजस्थान मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश के किसान प्रतिनिधियों का अफीम किसान सम्मेलन नीमच में प्रस्तावित…पढ़िए।

नीमच – अफीम एकमात्र औषधिय उत्पाद है। जिससे 400 प्रकार की जीवन रक्षक दवाइयां बनती है, और इतना ही देश को विदेशी मुद्रा किसानों को रोजगार और मरीजों को सस्ती दवा सुलभ करने का एकमात्र कृषि उत्पाद है। उसके बावजूद भी कुछ भ्रष्ट अधिकारी षडयंत्र पूर्वक भारत के विश्व प्रसिद्ध बढ़िया अफीम को घटिया करके निजी कंपनी बजाज हेल्थ केयर को सीपीएस की आड़ में किसान को कंपनी का गुलाम बनाने के षड्यंत्र के खिलाफ विशाल अफीम किसान सम्मेलन प्रस्तावित है।

अफीम किसानो के प्रमुख पांच मांग बिंदु हैं।

1.1997-98 में काटे सभी अफीम पट्टे बहाली दूसरे शब्दों में अफीम खेती कर चुके सभी किसानों को अफीम खेती करने के लाइसेंस दिया जाए।

  1. जिन खेतों में अफीम फसल खड़ी है, सीपीएस की आड़ में बिना लुवाई चिराई के रबड़ की पॉलिसी जारी की है उन सभी किसानों को लुवाई चिराई के अफीम पट्टे दिया जाए।
  2. चिराई लुवाई से अफीम पैदा कर रहे, सभी किसानों को अफीम का अंतरराष्ट्रीय मूल्य किसानों को दिया जाए।
  3. अफीम पॉलिसी का निर्धारण नेता और अधिकारीयों से नहीं किसान प्रतिनिधियों की सहभागिता से बनाई जाए।
  4. अफीम एक औषधिय उत्पाद है। जिसको निजी कंपनी के हाथ में जाने से हर हाल में रोका जाए।

सरकार सीपीएस की आड़ में निजी कंपनी को अफीम फसल का ठेका दे रही है तो सरकारी कंपनी को क्यों नहीं दिया जा रहा है? और सरकार किसानों का भला करना चाहती है तो रात के अंधेरे में तीर क्यों चला कर किसानों को बर्बाद कर रही है दिन के उजालों में किसान की सहभागिता से अपनी अफीम पॉलिसी क्यों नहीं बनाई जाती है। दूसरी बात सीपीएस से कैसे? और किस? आधार पर नशा कम होगा। जबकि सच तो यह है कि अफीम से नशा नहीं, दवाईयां बनती है। नशे की दिशा में नारकोटिक्स विभाग किसान को जबरदस्ती धकेल रहा है। दोषी किसान नहीं, दोषी तो दल्ले दलाल व दलाल मुखिया और भ्रष्ट अधिकारी ही हैं, आम अफीम किसान 1% दोषी नहीं है। किसान भाइयों जागो अफीम घटिया नहीं, अधिकारी घटिया है। किसानों के देश में किसानों को अपने ही खेत में निजी कंपनियों का गुलाम बनाने का जो सोचा समझा षड्यंत्र है। उसके खिलाफ आवाज को बुलंद किया जाए। सोशल मीडिया के थ्रू राजस्थान मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश के सभी किसानों को जगा कर सदस्यता अभियान को सफल बना कर मार्च में एक बुलंद आवाज सरकार तक पहुंचा कर किसानों को आर्थिक आजादी के लिए परंपरागत अफीम खेती को बचाया जाए।

मेक इन इंडिया – मेड बाय किसान

मांगीलाल मेघवाल बिलोट
किसान पुत्र शिक्षक,
संरक्षक – भारतीय अफीम किसान संघर्ष समिति राजस्थान मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश
9929159539, 6377441628

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Author: MP7 News

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